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पंचांग के २७ योग

पंचांग में ‘योग’ मुख्य रूप से व्यक्ति के चरित्र, व्यवहार और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। यहाँ २७ योगों की सूची और उनके मूल स्वभाव का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।

 

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२७ योग और उनके सामान्य गुणधर्म

१. विष्कुम्भ (Vishkumbha): प्रभावशाली व्यक्तित्व, लेकिन शत्रुओं से घिरे रहने वाले। (अशुभ माना जाता है)

२. प्रीति (Preeti): प्रेमपूर्ण स्वभाव, मिलनसार और सुखद जीवन जीने वाले।

३. आयुष्मान (Ayushman): दीर्घायु, स्वस्थ और जीवन में सभी सुख प्राप्त करने वाले।

४. सौभाग्य (Saubhagya): भाग्यशाली, परोपकारी और सुखी वैवाहिक जीवन वाले।

५. शोभन (Shobhana): सुंदर, गुणी और कलाप्रेमी व्यक्तित्व।

६. अतिगण्ड (Atiganda): जीवन में संघर्ष और अचानक आने वाली बाधाएं। (अशुभ माना जाता है)

७. सुकर्मा (Sukarma): सत्कर्म करने वाले, कार्यकुशल और समाज में सम्मानित।

८. धृति (Dhriti): धैर्यवान, स्थिर बुद्धि और विद्वान।

९. शूल (Shoola): क्रोधी स्वभाव, साहसी लेकिन कभी-कभी कलह करने वाले। (अशुभ माना जाता है)

१०. गण्ड (Ganda): स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और अस्थिरता। (अशुभ माना जाता है)

११. वृद्धि (Vriddhi): निरंतर प्रगति करने वाले और व्यापार में सफल।

१२. ध्रुव (Dhruva): एकाग्र, स्थिर और अपनी बात के पक्के।

१३. व्याघात (Vyaghata): कार्य में चतुर लेकिन कभी-कभी हिंसक विचार वाले। (अशुभ माना जाता है)

१४. हर्षण (Harshana): हमेशा प्रसन्न रहने वाले और उत्सव प्रेमी।

१५. वज्र (Vajra): शारीरिक रूप से शक्तिशाली और शत्रुओं पर विजय पाने वाले। (अशुभ माना जाता है)

१६. सिद्धि (Siddhi): हर कार्य में निपुण और सफलता प्राप्त करने वाले।

१७. व्यतिपात (Vyatipata): जीवन में अस्थिरता और अप्रत्याशित घटनाएं। (अत्यंत अशुभ माना जाता है)

१८. वरीयान (Variyana): श्रेष्ठ, धनवान और विलासी जीवन।

१९. परिघ (Parigha): बाधाओं को पार करने वाले, लेकिन स्वभाव से जिद्दी। (अशुभ माना जाता है)

२०. शिव (Shiva): शांत, धार्मिक और मंत्र-शास्त्र के ज्ञाता।

२१. सिद्ध (Siddha): धार्मिक कार्यों में रुचि और शुद्ध आचरण।

२२. साध्य (Sadhya): लक्ष्य के प्रति समर्पित और कार्य साधने में निपुण।

२३. शुभ (Shubha): सत्य बोलने वाले, गुणी और मृदुभाषी।

२४. शुक्ल (Shukla): शुद्ध अंतःकरण, तेजस्वी और ज्ञानवान।

२५. ब्रह्म (Brahma): अत्यंत विद्वान, गोपनीय बातों के ज्ञाता और ईमानदार।

२६. ऐन्द्र (Indra): नेतृत्व क्षमता, धनवान और राजसी ठाठ।

२७. वैधृति (Vaidhriti): चतुर और साहसी, लेकिन जीवन में उतार-चढ़ाव। (अशुभ माना जाता है।

  प्रथम योग ‘विष्कुम्भ’ पर विस्तार से चर्चा

*🔯 विष्कुम्भ योग: विस्तृत विवेचन 🔯*

‘विष्कुम्भ’ शब्द का अर्थ होता है – ‘विष से भरा हुआ घड़ा’। आकाश मंडल में जब सूर्य और चंद्रमा की गणना 0^\circ से 13^\circ 20’ के बीच होती है, तब यह योग बनता है। इसके स्वामी यम (Yamraj) हैं।

🔹 स्वभाव और व्यक्तित्व (Nature & Personality)

विष्कुम्भ योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली होता है।

 * दृढ़ निश्चय: ऐसे व्यक्ति जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं।

 * रहस्यमयी: इनके मन में क्या चल रहा है, यह जान पाना कठिन होता है।

 * भाग्य का साथ: इन्हें पैतृक संपत्ति या अचानक धन लाभ होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं।

 * शत्रु पक्ष: ये अपने शत्रुओं पर भारी पड़ते हैं, लेकिन इनके गुप्त शत्रुओं की संख्या भी अधिक होती है।

🔹 कार्य और वित्त (Work & Finance)

 * इस योग के जातक तार्किक और चतुर होते हैं, इसलिए ये वकालत, राजनीति या कूटनीति में बहुत सफल होते हैं।

 * इन्हें आभूषणों, रत्नों और जमीन-जायदाद से जुड़े कार्यों में विशेष लाभ मिलता है।

 * आर्थिक रूप से ये समृद्ध होते हैं, लेकिन इनके खर्चे भी शाही होते हैं।

🔹 संबंध (Relationships)

 * विष्कुम्भ योग वाले व्यक्ति अपनों के प्रति बहुत समर्पित होते हैं, लेकिन इनका स्वभाव थोड़ा दबदबा (Dominating) रखने वाला हो सकता है।

 * परिवार में इन्हें मान-सम्मान मिलता है, पर कभी-कभी इनके तीखे बोल रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर सकते हैं।

🔹 प्रिडिक्शन के लिए विशेष सूत्र (Prediction Tips)

 * मुहूर्त विचार: विष्कुम्भ योग की प्रथम ५ घटियाँ (लगभग २ घंटे) अत्यंत अशुभ मानी जाती हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, यात्रा या नया अनुबंध (Contract) नहीं करना चाहिए।

 * दोष प्रभाव: यदि कोई व्यक्ति इस योग में जन्म लेता है, तो उसे जीवन के शुरुआती चरणों में संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन मध्य आयु के बाद वह बहुत उन्नति करता है।

 * विषैला प्रभाव: नाम के अनुरूप, जातक को खान-पान में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इन्हें फूड पॉइजनिंग या रक्त संबंधी अशुद्धि की समस्या जल्दी हो सकती है।

🔹 सलाह (Advice)

 * इस योग के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए जातक को भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए (क्योंकि शिव ने ही विष का पान किया था)।

 * मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना इनके लिए कवच का काम करता है।

*प्रीति योग*

आज हम २७ योगों की श्रृंखला में दूसरे योग ‘प्रीति’ के बारे में विस्तार से जानेंगे। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह योग अत्यंत शुभ और प्रेम प्रदायक माना जाता है।

प्रीति योग: विस्तृत विवेचन

‘प्रीति’ योग का अर्थ है – ‘प्रेम, लगाव और मित्रता’। जब सूर्य और चंद्रमा का योग 13^\circ 20′ से 26^\circ 40’ के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इसके स्वामी विष्णु (Lord Vishnu) हैं, जो जगत के पालनहार और प्रेम के प्रतीक हैं।

🔹 स्वभाव और व्यक्तित्व (Nature & Personality)

प्रीति योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति स्वभाव से बहुत ही सौम्य, मिलनसार और आकर्षक होता है।

 * लोकप्रियता: ऐसे जातक समाज में बहुत लोकप्रिय होते हैं। लोग सहज ही इनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं।

 * परोपकारी: ये दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं और न्यायप्रिय होते हैं।

 * कलाप्रेमी: इनमें सौंदर्य बोध बहुत अच्छा होता है और ये कला, संगीत या साहित्य के शौकीन होते हैं।

 * वाणी: इनकी वाणी में मधुरता होती है, जिससे ये किसी का भी दिल जीत लेते हैं।

🔹 कार्य और वित्त (Work & Finance)

 * प्रीति योग के जातक टीम वर्क में बहुत सफल होते हैं। ये अच्छे मैनेजर, सलाहकार (Consultant) या पब्लिक रिलेशन ऑफिसर बन सकते हैं।

 * कला, फैशन, मीडिया और सजावट (Interior Designing) के क्षेत्र में ये विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।

 * इन्हें आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है और समाज के प्रभावशाली लोगों से सहयोग मिलता रहता है।

🔹 संबंध (Relationships)

 * यह योग रिश्तों के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इनका वैवाहिक जीवन सुखद होता है।

 * ये अपने जीवनसाथी और परिवार के प्रति बहुत वफादार और स्नेही होते हैं।

 * मित्रों का घेरा बड़ा होता है और ये मित्रता निभाने में विश्वास रखते हैं।

🔹 प्रिडिक्शन के लिए विशेष सूत्र (Prediction Tips)

 * मुहूर्त विचार: प्रीति योग सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है। सगाई, विवाह, नए प्रेम संबंध की शुरुआत, या मेल-मिलाप के लिए यह योग श्रेष्ठ फल देता है।

 * सफलता: इस योग में शुरू किए गए कार्यों में लोगों का भरपूर समर्थन और सहयोग मिलता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

 * शुभता: क्योंकि इसके स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए यह योग जीवन में ऐश्वर्य और शांति प्रदान करता है।

🔹 सलाह (Advice)

 * अपनी इस प्रेमपूर्ण ऊर्जा को बनाए रखने के लिए जातक को भगवान विष्णु या लक्ष्मी-नारायण की पूजा करनी चाहिए।

 * ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप इनके लिए सौभाग्यवर्धक होता है।

 * किसी को कटु वचन बोलने से बचें, क्योंकि आपकी शक्ति आपकी मधुर वाणी ही है।

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