
यह संसार नश्वर है, और जो जन्म लेता है, उसे एक दिन मृत्यु को प्राप्त होना है। जन्म कुंडली में मृत्यु का समय, कारण, और स्थान पहले से ही तय होता है। ज्योतिष के अनुसार, मृत्यु का समय, ग्रह स्थिति, और योगों के आधार पर देखा जा सकता है। मृत्यु योग को समझने के लिए मुख्य रूप से मारक ग्रहों, आयु स्थान (आठवें भाव), और दशाओं का अध्ययन किया जाता है।
*मारक ग्रह और स्थान*
जन्म कुंडली के लग्न भाव से आठवां भाव आयु स्थान कहलाता है, जो व्यक्ति की दीर्घायु और मृत्यु से संबंधित जानकारी देता है।
आठवें भाव से बारहवां भाव यानी सातवां भाव और तीसरे भाव को भी मृत्यु से जोड़ा जाता है।
दूसरे और सातवें भाव को “मारक भाव” कहा जाता है, और इन भावों के स्वामियों को “मारक ग्रह” माना जाता है।
*2. मारक दशा और अंतर्दशा:*
मारक ग्रहों की दशा या अंतर्दशा के दौरान जातक की मृत्यु हो सकती है।
शुभ ग्रह भी अगर मारक भावों के स्वामी हों, तो मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
*आठवें भाव का महत्व*
आठवें भाव में स्थित ग्रह और इसके स्वामी मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
*2. दुष्प्रभावी ग्रह योग:*
चंद्र से 22वें द्रेष्काण का स्वामी और 64वें नवांश का स्वामी अत्यंत अशुभ माने जाते हैं।
तृतीय भाव, षष्ठ भाव, और अष्टम भाव के स्वामी मृत्यु को दर्शाते हैं।
*आठवें भाव में ग्रह और मृत्यु का कारण*
यम योग और अन्य योग
जब मंगल और शनि की युति आठवें भाव या उसके स्वामी से संबंध बनाती है, तो यम योग बनता है।
शनि आठवें भाव में होने पर दीर्घायु प्रदान कर सकता है, लेकिन यदि शनि अशुभ हो, तो दीर्घायु की संभावना कम हो जाती है।
राहु और केतु जब दूसरे, सातवें, आठवें, या बारहवें भाव में हों, तो ये स्वयं मारक ग्रह बन जाते हैं।
मकर और वृश्चिक लग्न में राहु विशेष रूप से अशुभ माना जाता है।
तीसरे भाव और मृत्यु का कारण
सूर्य: सरकार या सजा के कारण मृत्यु।
चंद्र: नशे या जहरीले पदार्थ के सेवन से मृत्यु।
मंगल: आग, शस्त्र, या दुर्घटना से मृत्यु।
शनि और राहु: ऊंचाई से गिरने, जहरीले पदार्थ, या दुर्घटना से मृत्यु।
गुरु: ट्यूमर या सूजन से मृत्यु।
शुक्र: मूत्र संबंधी बीमारी से मृत्यु।
चर राशि: विदेश में मृत्यु।
स्थिर राशि: घर पर मृत्यु।
द्विस्वभाव राशि: यात्रा के दौरान मृत्यु।
विशेष मृत्यु योग
चंद्रमा का पाप ग्रहों से ग्रस्त होना व्यक्ति को आत्महत्या की ओर प्रेरित कर सकता है, खासकर अमावस्या या पूर्णिमा के समय।
यदि चतुर्थ भाव में शनि, सप्तम भाव में चंद्र, और दशम भाव में मंगल हो।
यदि सूर्य और चंद्र कन्या राशि में हों और उन पर अशुभ दृष्टि हो।
यदि लग्न भाव में सूर्य और चंद्र दोनों स्थित हों।
मृत्यु योग के अशुभ तिथि और दिन
ज्योतिष में मृत्यु योग को जानना और समझना जटिल है।
सटीक गणना के लिए कुंडली के सभी भावों, ग्रह स्थिति, और दशाओं का गहन अध्ययन करना आवश्यक है।
ऐसे योगों की जानकारी जातक को सतर्कता और धार्मिक उपायों की ओर प्रेरित कर सकती है।