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कोविदार की कहानी ! जो श्री राम जन्मूभि मंदिर के ध्वज पर अंकित है !

जब प्रधामंत्री मोदी ने कोविदार वृक्ष अंकित ध्वज को श्री राम मंदिर पर फहराया तो चर्चा होने लगी कि आखिर ये कोविदार क्या है ? दरअसल ये कोविदार आज कल पाया जाने वाला कचनार का पेड़ ही है जो अत्यंत सुंदर होता है और जिसके औषधीय प्रयोग आयुर्वेद में विशेष जगह रखते हैं ।

 

इस कोविदार की छाल का उपयोग शरीर में कहीं भी मौजूद गांठों को गलाने में किया जाता है इसके लिए इस छाल में अन्य जड़ी बूटियों को भी मिलाया जाता है । आयुर्वेद में कचनार को दिव्य कहते हुए इसे पेट के रोगों कब्ज और गैस की भी रामबाण औषधि माना गया है । कचनार के पेड़ों की छाल शरीर को सुडौल बनाने में मददगार होती हैं । यदि कोई स्त्री कचनार का नित्य सेवन करे तो वह कचनार हो जाती है यानी उसकी उम्र बहुत कम नजर आने लगती है  । मित्रों आयुर्वेद पर रिसर्च मेरा अत्यंत प्रिय विषय है इस पर आपसे आगे भी बात होती रहेगी ।

लेकिन आज ये समझना जरूरी है कि इस कोविदार का महत्व आखिर क्या है । दरअसल ये कोविदार धर्म और राज की सत्ता के रूप में अयोध्या नरेश के ध्वज पर अंकित था ।

 

वाल्मीकि रामायण में इसका प्रसंग आता है जब भगवान श्री राम, लखन को आदेश देते हैं कि इतनी धूल क्यों उड़ रही है कोलाहल क्यों है देखो क्या कोई सेना आ रही है तब लखन जी ने एक पेड़ पर चढ़कर उस सेना को देखा था जिस के ध्वज पर अंकित कोविदार लहरा रहा था और ध्वज पर अंकित कोविदार से ही वो पहचान पाए थे कि अयोध्या की ही सेना है जिसका नेतृत्व भरत के हाथों में हैं ।

 

माना जाता है कि ये पहला हाईब्रिड पेड़ है जिसको ऋषि कश्यप ने बनाया था । ये हरसृंगार और मदार के पौधे को मिलाकर बनाया गया था और हरसृंगार भी स्वर्ग लोग का पेड़ माना जाता है और इसका भी औषधीय प्रयोग होता है गठिया और सायटिका में भी कुछ जड़ी बूटियों के साथ इसका औषधीय उपयोग होता है।

चरक संहिता – (रोगभिषग्जितीय – वमन द्रव्यों का वर्णन)

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