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कुंडली का 7वां भाव: विवाह और जीवनसाथी पर ग्रहों का प्रभाव

सप्तम भाव क्या दर्शाता है?

यह भाव विवाह, जीवनसाथी, वैवाहिक सुख, व्यावसायिक साझेदारी और सार्वजनिक व्यवहार का प्रतिनिधित्व करता है।

शुभ और सौम्य प्रभाव

गुरु (Jupiter) – सुखद एवं मंगलकारी

विद्वान और संस्कारवान जीवनसाथी; विवाह के बाद भाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है।

शुक्र (Venus) – प्रेम और आकर्षण

आकर्षक और रोमांटिक जीवनसाथी; भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रेम विवाह के प्रबल योग।

चंद्रमा (Moon) – भावनात्मक लगाव

संवेदनशील और देखभाल करने वाला साथी; शीघ्र विवाह की संभावना और प्रगाढ़ संबंध।

बुध (Mercury) – बुद्धि और संवाद

वाक्पटु और बुद्धिमान जीवनसाथी; व्यापारिक साझेदारी में विशेष लाभ और सफलता।

चुनौतीपूर्ण और गंभीर प्रभाव

मंगल (Mars) – मांगलिक दोष और ऊर्जा

साहसी पर हठी जीवनसाथी; दांपत्य जीवन में विवाद और वैचारिक मतभेद की संभावना।

सूर्य (Sun) – अहंकार और प्रतिष्ठा

प्रभावशाली और अधिकारप्रिय साथी; वैवाहिक जीवन में अहंकार के कारण टकराव या विलंब संभव।

शनि (Saturn) – विलंब और जिम्मेदारी

विवाह में देरी संभव; जीवनसाथी परिपक्व और जिम्मेदार होता है, जिससे संबंध स्थायी बनते हैं।

छाया ग्रहों का प्रभाव

राहु (Rahu) – अपरंपरागत संबंध

अचानक या अंतरजातीय विवाह के योग; संबंधों में तीव्र आकर्षण के साथ भ्रम की स्थिति।

केतु (Ketu) – वैराग्य और दूरी

साथी के साथ भावनात्मक संपर्क में कमी या आध्यात्मिक अलगाव का अनुभव।

कुण्डली में बनने वाले विभिन्न अच्छे व बुरे योग

कुंडली मिलान बहुत जरूरी है

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