
अभी 25 दिसंबर 2025 को चंद्रशेखर रावण और उसके कार्यकर्ताओं ने पूरे देश के अंदर मनु स्मृति दहन दिवस मनाया । खुद तो चंद्र शेखर रावण मनु स्मृति जलाकर भाग निकला और अब उसके गुर्गों पर जगह जगह पुलिस डंडे बजा रही है । रायबरेली, बनारस, कौशांबी में पुलिस आरती का थाल लिए खड़ी है ।
इसी तारीख के दो दिन पहले बांग्लादेश के अंदर मुगलमानों ने आसमानी किताब की खिदमत में दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू दलित को जलाकर मार दिया । कल आंकड़ा आया है कि बीते 6 महीने में 75 हिंदुओं को बांग्लादेश में ईशनिंदा का आरोप लगाकर मार दिया गया है । बांग्लादेश में रहने वाले 90 प्रतिशत हिंदू दलित ही हैं इसलिए इसमें भी अधिकांश मरने वाले 70 से ज्यादा दलित ही हैं लेकिन चंद्रशेखर रावण और उसके गुर्गों की ये हिम्मत नहीं है कि वो उस आसमानी किताब पर दो शब्द भी बोल सके लेकिन वो मनुस्मृति को जलाने का पाखंड रच रहे हैं ।
जरा इनसे ये सवाल पूछना चाहिए कि किस आधार पर मनु स्मृति का विरोध किया जा रहा है । बीते 75 सालों में कितने दलितों के कानों में शीशा पिघला कर डाला गया है । या क्या कोई ऐतिहासिक प्रमाण है कि किसी हजारों सालों के मानव इतिहास में किसी भी दलित के कानों में पिघला हुआ शीशा डाला गया है । ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है । जबकि 6 महीने में ही आसमानी किताब का हवाला देकर कितने लोगों को मार पाकिस्तान और बांग्लादेश में मार दिया गया है ।
लेकिन इसके बावजूद भी चंद्रशेखर रावण भोले भाले दलित लोगों को भड़काकर उकसाकर उन पर मुकदमे लदवा रहा है और उनको पुलिस से पिटवा रहा है और खुद सांसद बनकर मौज काट रहा है ।
उम्मीद है कि दलित हिंदू इन बातों को समझेंगे ।
*जिहाद की खूबसूरती*
जंजीरों में कैद करके ज़ैनब को 750 किमी दूर कूफा (इराक) से दमास्कस (सीरिया) ले जाया गया।
ये लंबी यात्रा जंजीरों में कैद बच्चों और महिलाओं पर बहुत भारी पड़ी और कई ने सर्दियों में तड़पकर दम
तोड़ दिया। दमास्कस में पहुँचने के बाद उन्हें 72 घंटों तक बाज़ार के चौराहे पर खड़ा रखा गया।
उस समय जंग जीतने वाली फौज हारने वाली फौज के लोगों का कटा हुआ सिर साथ लेकर जाती थी और अपनी जीत का जश्न मनाती थी। इस पूरे सफर में जैनब के साथ उसके भाई हुसैन और अब्बास का कटा हुए सिर साथ लाया गया था।
बाद में यजीद से ज़ैनब ने माँग की थी की उन्हें शहीदों के सिर लौटा दिए जाएं और उन्हें एक घर दिया जाए जहाँ वो मातम मना सकें।।मोहम्मद साहब के गुजर जाने के तीन महीने में ही उनकी बेटी फातिमा की घर में घुसकर निर्मम हत्या कर दी गई थी।
उनके दामाद अली को रमजान में नमाज पढ़ते हुए मारा गया। बड़े नवासे को जहर दिया गया और छोटे नवासे को कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूख और प्यास से तड़पाने के बाद शहीद कर दिया गया।
जैनब मोहम्मद साहब की नवासी थी जो जंजीरों में कैद नए खलिफा यजीद के सामने खड़ी थी। कमाल की बात ये थी जब ये सब हो रहा था उस समय ना अमेरिका बना था, ना इजरायल था, ना हथियार बेचने वाली कंपनियाँ थी और जो ये सब कर रहे थे वो भी कोई गैर नहीं थे।
ये जौहर करती औरतें, तबाह होते विजननगर और देवगिरी, लाशों की बेकद्री, कटे हुए सिरों के पिरामिड ये सब तो भारत में बाद में आया। इस मानसिकता का सबसे पहला पीड़ित मोहम्मद साहब का परिवार ही बना। उधर कर्बला के मैदान में 70 का सामना हजारों से था, इधर चमकौर के युद्ध में 40 का 10 हजार से।
उधर मोहम्मद साहब का परिवार था, इधर गुरू गोविंद सिंह का। उधर शहीद हुसैन का कटा शीश उनकी चार साल की बेटी को खाने की थाल में सजा कर दिया गया, इधर दारा का कटा शीश शाहजहां को खाने की थाल में दिया गया। उधर जैनब यजीद से अपने भाईयों का कटा हुआ शीश माँग रही थी ताकि उनका मातम मनाया जा सके, इधर सोनीपत का कुशाल सिंह दहिया गुरू तेगबहादुर के शीश को ससम्मान वापस आनंदपुर साहिब भेजने के लिए अपना सिर काटकर मुगल सेना को सौंप रहे थे।
उधर शहीद हुसैन की छोटी बेटी को तड़पाया गया, इधर गुरू गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को जिंदा दीवार में चूनवा दिया गया। उधर जैनब को कुफा (इराक) से दमास्कस ले जाया गया, इधर बंदा वीर बैरागी को जोकर बनाकर हाथी में लादकर लाहौर से दिल्ली लाया गया, जहाँ उनके मुँह में उनके तीन साल के बच्चे का माँस डाला गया। उधर कर्बला शहीदों के शवों की बेकद्री की गई, इधर गुरू गोविंद सिंह के बच्चों को दाह संस्कार के लिए जमीन सोने के सिक्के लगाकर बेची गई। जो जहालत 7वीं शताब्दी में अरब में थी…
वो 17वी शताब्दी में भारत में भी साफ दिख रही थी। फिर भी यजीद तो शैतान था और औरंगजेब जिंदा पीर।
वैसे यजीद और औरंगजेब में कोई अंतर नहीं है इस्लामिक हूकूमत के खिलाफ जो भी आवाज उठाता है वो काफिर ही माना जाता है और यही गुनाह हुसैन ने भी किया था।
बाकी आप जो बोते है उसे आपके साथ साथ दूसरों को भी काटना पडता है हूजूर ने जो पूरी जिंदगी बोया उनके जाने के बाद उनके परिवार ने काटा और आज भी पूरी दुनिया काट रही है।